थोड़ा शांत होने का समय आ गया है!
"उन सभी ने इस सुन्दर चित्रमय केंद्र का स्वप्न देखा, और , वाकई उनकी खोज का प्रतिफल केवल उन सुदूर वक़्त के चित्रकार और कविओं द्वारा प्रकट हो सकता है जिन्होंने गहराई में मौजूद अजूबों के बीच अद्भुत काव्यात्मक नीले फूल की खोज की थी" जैसा फर्डीनांड ग्रेगोरोवियस ने १८८० में रूमानी दृश्य देखकर टिपण्णी की थी. प्राचीन समय से जाने जानी वाली, काप्री की नीली कंदरा में राक्षसों का निवास मन जाता था.युवा कलाकार, अगस्त कोपिस्क, जो अगस्त १८२६ में काप्री आये, इस अन्धविश्वास से नहीं डरे. अपने मित्र, एर्न्स्ट फ्राइज के साथ उन्होंने परीकथाओं जैसे प्रकाश और रंगों का खेल करती कंदरा को ढूंढ निकाला.१७ अगस्त,१९२६ को उन्होंने होटल मालिक, पगानो के अतिथि पुष्टिका में लिखा: "हमने इसे नीली कंदरा ('ला ग्रोट्टा अज़्ज़ूरा') नाम दिया है क्यूंकि सागर की गहराई से आती रौशनी इसके वृहद् नीले स्थान को जगमगाता है. पानी से छन कर आते नीले प्रकाश में हर लहर को लपटों जैसा देख आगंतुक अभिभूत होते हैं." कलाकारों ने कंदरा को चित्रित किया जैसा कोपिस्क ने कई बार वर्णित और प्रकाशित किया. अपने पुनर्खोज से कंदरा द्वीप पर पर्यटकों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया. कई चित्रकारों ने इस प्राकृतिक दृश्य को अपने चित्रों का विषय बनाया जिनमे कार्ल फ्रेड्रिच सिफ़्फेरत शामिल है जो इटली यात्रा के उपरांत दक्षिणी परिदृश्य की तरफ कई बार मुड़े.
इस बेहद रूमानी चित्र को हम बर्लिन के अल्ते नेशनल गैलरी के सौजन्य से प्रस्तुत कर रहे हैं:)
पुनश्च : अगर आपको इस चित्र का भाव पसंद आया है तो फर्डीनांड होडलर की पर्वतीय परिदृश्यों के बेहतरीन चित्रआपको जरूर पसंद आएंगे<3